All India Khatik Federation

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All India Khatik Federation
ऑल इंडिया खटीक फेडरेशन
AbbreviationAIKF
NicknameAIKF
FounderNetram Thagela
Founded atDelhi
HeadquartersDelhi
National President
Netram Thagela

फैडरेशन का इतिहास

कारोना पीड़ितों मदद करें व कैसे और कहां से होगी बताये-ठगेला फैडरेशन की ओर से दिनांक 09 मई को आन लाईन सभा श्री देवीलाल चंदेल, अध्यक्ष राजस्थान के संयोजकत्व में हुई। जिसमें फैडरेशन कैसे और क्यों बनी, इसने क्या किया है आगे क्या करें पर चर्चा हुई। इसमें विभिन्न प्रदेशों के जिला प्रतिनिधियो ने कारोना पीड़ितों के लिए किये कार्य बताये‌। श्री नेतराम ठगेला ने महाराष्ट्र, तेलेंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, राजस्थान, दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आये बंधुओं के कोरोना पीड़ितों की मदद पर धन्यवाद देते हुए स्थानिय स्तर कोरोना पीड़ितों को मदद में तेजी लाने का आग्रह किया। इसमें तेजी लाने के लिए राष्ट्रीय मिटिंग के बाद राज्य स्तर की मिटिंगे बुलाये।इस संदर्भ में औरंगाबाद (महाराष्ट्र) और अहमदाबाद (गुजरात) की ओर विशेष ध्यान दिलाया।

श्री नेतराम ठगेला ने आगे बताया फैडरेशन सिदारृथ के बुद्ध धम्म, संत दुर्बलनाथ जी के काल्या से अनुभव आत्म प्रकाश और बाबासाहेब के सतत प्रयासों की तरह निरंतर खोज और अनुभव पर बना है। जिसकी शुरुआत दिल्ली के करोल बाग के तहत टैंक रोड से हुई यहां पर हम पिछले लगभग 60 सालो से रह रहे हैं। हजारों खटीक हमसे भी पहले से वहां रह रहे हैं। इतने सालों तक रहने के बाबजूद अपनी अपने में मगन रहने की परम्परा के कारण दिल्ली कि संस्कृति में नहीं ढले है। 70 के दशक में जन्माष्टमी बाल महोत्सव बाद में शहीदे आजम भगत सिंह की बनाई गई नौजवान सभा का पदाधिकारी होते हुए महसूस किया कि वहां के खटीको के शुभअवसर पर खाने का न्यौता देते वक्त वो सभी खटीकों को क्या वे राज्य जैसै राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आदि तो क्या उसमें से एक जगह का न्यौता देते थे, जैसे मेरठ वाले, शेखावाटी, आदि। कहां हम बचपन से दूनिया के मजदूरों एक करने के भाषण सुनते हैं और यहां--/खटीक मे भावनात्मक एकता कैसे होगी? इन हालातो को देखकर करोलबाग नौजवान सभा को मजबूत करके, ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल खोला जिसमें किसी भी स्थान से आये खटीक बच्चे नि: शुल्क या मामूली दरों में पढ़ सकते थे। वही विशाल नवयुवक संस्था ने वाचनालय बनाया। जनसमस्याएं उठाने और 1978 के दिल्ली में आई बाढ पीडितों की मदद में समाज के युवाओं का एक हिस्सा साथ आया, सभी को मिलाकर खटीक संगठन बनाने की बात आई जिसे कामरेड चरण सिंह सांवरिया ने कहा इसके लिए तुम्हें से. तारा सिंह पलवार, शेर सिंह बडसीवाल जैसे बुजुर्गों से बात करनी होगी। खैर इसके बाद दौलत चंदेल, का. सुरेश किराड़ आदि को साथ लेकर हर गली में जाकर सभा करके वहां के हस्ताक्षर लेकर दो दो आदमियों को लेकर खटीक समाज सेवा समिति बनाई। इसके बाद समाज में प्रभाव बढ़ने के बाद दिल्ली की कालोनियों में जाकर शिक्षा पर जोर देने का आग्रह किया वर्षो तक काम करने के बाद 1988 में लगभग 50 कालोनियों को लेकर शिक्षा का विस्तार और सामाजिक कुरीतियां को दूर करने के लिए दिल्ली प्रदेश खटीक समाज का गठन किया। अनेक शिक्षण, सिलाई कढ़ाई केंद्र खोले। इससे पहले से दिल्ली विश्वविद्यालय में कैंप लगाकर गाईडेंस देने का काम करते थे उसे समाज से जोड़ा बहुत से बच्चों को अच्छे कालेजों में दाखिला दिलवाने में सहयोग किया। दिल्ली प्रदेश खटीक समाज ने आगरा में अंडर सेक्रेटरी को रिवर्ट करने का विरोध करते हुए एक कार्यक्रम कांस्टिट्युशन क्लब में किया। इसके साथ हर वर्ष मैधावियो का सम्मान और कैरियर काउंसलिंग कैंप लगाना शुरू किया जो आज भी हो रहा है। इसके बाद समाज पर संकट जैसे 90 के दशक में आगरे का पानी कांड हो या राजस्थान के अलवर के जगता बसई में दबंगो के द्वारा मारकर पेड़ पर लटकाने का मामला हो या अन्य दिल्ली प्रदेश खटीक समाज के कार्यकर्ता जाते रहे है फैडरेशन आज भी उस जिम्मेदारी को निभा रही हैं। दिल्ली में लाखों की खटीक रहने के बावजूद 90 के दशक तक किसी भी राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टियों ने विधानसभा या मैट्रोपोलिटन तक की टिकट तक नहीं दी। अतः राजनीतिक पैठ

बनाने के लिए क्षेत्र की पंचायतों या गली मौहल्ले से उठकर राष्ट्रीय स्तर के पूर्ण वातानुकूलित हालो में सम्मेलन करके विभिन्न पार्टियों के प्र्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को खटीकों की दिल्ली में ताकत दिखाना शुरू किया। कम आबादी होने के बावजूद ब्राह्मण सत्ता में अपने वेद, पुराण, गीता, रामायण समेत विपुल साहित्य होना है‌। इसलिए साहित्य का निर्माण करने के लिए 1992 के सम्मेलन में मार्च 93 से पूर्व खटीक पत्रिका निकालने के लिए यह एक कमेटी बनाई। कुछ न होने पर श्रीमति बिमला ठगेला के संपादकत्व में मार्च 93 में खटीक पत्रिका प्रकाशित की जिसके पहले अंक का सारा खर्च हरीचंद ठगेला ने देते हुए कहा पत्रिका के प्रकाशन जो समाज से हो जाये ठीक है बाकि खर्चा मैं देता रहुंगा।

1993 मे दिल्ली प्रदेश खटीक समाज का श्री लक्ष्मी नारायण टांक के संयोजकत्व व श्री ठगेला की अध्यक्षता में 1993 में मंगोलपुरी मे सम्मेलन हुआ जिसमें उस समय राष्ट्र नेता श्री रामविलास पासवान श्री रामवीर सिंह विधूड़ी, श्री विरेश प्रताष चौधरी जैसे नेताओं के आने से दिल्ली की राजनीति पर असर हुआ और एक ओर बड़े खटीक सम्मेलन की योजना प्लासि्टिक मार्केट के सहयोग से बनी। दो महिने में ही इतिहास का सबसे बड़ा महासम्मेलन हुआ जिसमें 50 हजार खटीक मौजुद थे। उस मंच पर बाबा साहेब के सहयोगी रहे कौमी मुसाफिर बाबा प्रभाती दिल्ली के बेताज बादशाह एचकेएल भगत, केंद्रीय मंत्री, जग्गनाथ पहाड़ियां, पूर्व मुख्यमंत्री मंत्री राजस्थान सरकार, शिवचरण राजौरा, पूर्व मंत्री, पंजाब सरकार, श्रीमति शांति पहाड़ियां, पूर्व सांसद की उपस्थिति में श्री सज्जन कुमार, सांसद ने कहा ठगेला टिकट तुम लोगे या किसी को दिलाओगे। प्रत्युतर में श्री ठगेला ने कहा मेरे समेत हमारे सभी पदाधिकारी सरकारी करृमचारी/अधिकारी है, हमें तो टिकट नहीं चाहिए, न हमें गैस, पेट्रोल, मिट्टी के तेल की एजेंसी चाहिए। हमारे समाज में जन्मे और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को टिकट दे‌। कुछ ही दिनों में तीनों राष्ट्रीय पार्टियों यथा कांग्रेस, जनता दल और बीजेपी ने इतिहास पहली बार खटीकों को टिकटें दी‌।

अगले चुनाव से पूर्व सम्मेलन में दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री साहिब सिंह वर्मा से पांच टिकटो की मांग की प्रत्युतर श्री वर्मा ने कहा अभी बीजेपी से खटीक समाज इतने उम्मीदवार नहीं है दो टिकटे दुंगा और ठगेला के नौकरी छोड़ने पर एक टिकट उन्हें मिल जाऐगी‌। दो टिकटें मिली भी।

भारत में धर्म सबसे महत्वपूर्ण है इसलिए हमने 1994 के शुरू से ही प्रयास करते हुए ऐतिहासिक दिल्ली के कालका मंदिर में प्राचीन खटीक धर्मशाला ढूंढकर वहां धर्म सम्मेलन करके सतगुरु दुर्बलनाथ जी समाज गुरु के रूप में प्रचारित करने के लिए ऐतिहासिक दिल्ली के रामलीला मैदान से 27 नवम्बर 1994 में संत जी शोभायात्रा प्रारंभ की‌। साथ ही हरवर्ष केलेंडर छापने और खटीक सामाजिक उत्थान पत्रिका में वाणिया छपने उसके पूरे देश में वितरण से समाज और महाराज जी का पूरे देश में प्रचार प्रसार हुआ‌।

1997 के बाद के दलित आंदोलन का जनक दिल्ली प्रदेश खटीक समाज है। सबसे पहले नियमित सभाओं से सभी संगठनों को संगठित करने की पहल की। इसके अतिरिक्त सामूहिक विवाह का पहला कदम परिचय सम्मेलन, विवाह केंदृर खोलने विवरणों पर आधारित पुस्तकें लिखने काम हम 90 के दशक से हम कर रहे हैं।

इन सब कार्यो को करते हुए दिल्ली प्रदेश खटीक समाज ने पूरे देश में खटीकों को आरक्षण दिलाने हेतु जंतर-मंतर पर 01 मई 2005 को धरना दिया। वहां अखिल भारतीय खटीक महासभा के अध्यक्ष श्री बीएस नागर ने सभी संस्थाओं को मिलाकर एक बनाने का प्रस्ताव रखा जिसका अखिल भारतीय खटीक उत्थान समिति ने श्री नेतराम ठगेला का नाम अध्यक्ष के लिए रखा। इसे शालिनता से नकारते हुए श्री ठगेला ने कहा मैं दिल्ली का काम छोड़ नहीं सकता, वैसे में दशकों से प्रयास कर रहा हूं। कोई अपनी संस्था बंद नहीं करना चाहता। श्री मोहन लाल प्रेमी(चौहान), अध्यक्ष अखिल भारतीय खटीक विचार मंच ने कहा फेडरेशन बना लेते हैं। सभी संस्थाऐ अपना अपना काम कर सकती हैं। अनेक सभाओं के बाद श्री ओमकार मल सोलंकी, निदेशक एन एफ एल इसके प्रथम अध्यक्ष बने।---शेष फिर कभी...